सच!
झूठ के शोर के नीचे दबी हुई, एक हलकी सी चीख है सच! धनवानों के पैरों तले रौंदी गयी, मजबूर गरीब वेश्या है सच! दो जून रोटी के लिए पत्थर तोड़ती औरत , को मिली पूरी मेहनत की आधी पगार है सच! प्रकृति के कहर से बिलखते लोगों.. के नाम पर दान किये गए के लाखों.. मे से मिले हज़ार रुपये है सच! धोखेबाजी की दुनिया मे पल पल अपमानित होता.. ईमानदारी का ईमान है सच! भ्रष्ट अधिकारी की रिश्वत के नीचे दम तोड़ती हुई सरकारी तनख्वाह है सच! कब्रिस्तान मे मुर्दों को गाड़ने की जगह के वास्ते लड़ते लोग है सच! स्वतंत्रा के जश्न के पीछे छिपा.. आतंकवाद का अराजक नृत्य है सच! अनेकता मे एकता के नारे पर सवाल उठता.. सांप्रदायिक दंगो का.. शोर है सच! जिंदा रहने की मजबूरी मे किया गया.. हर छोटा बड़ा पाप है सच.! मौत से बदतर जीवन जीने को मजबूर.. लोगों की सिसकती साँसे है सच...!
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